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पिछड़े वर्ग का वैचारिक दिवालियापन

पिछड़े वर्ग के वैचारिक दिवालिएपन की सबसे सटीक व्याख्या चौधरी चरण सिंह ने की थी। उनके अनुसार पिछड़ा वर्ग किसी जाति का नहीं, बल्कि एक सोच का नाम है। जिस दिन इसकी सोच से पिछड़ापन हट जाएगा, उसी दिन यह कौम अगड़ी हो जाएगी। जिंदा कौमें वैचारिक रूप से स्पंदित होती हैं। उनमें चेतना के लक्षण होते हैं। आत्मश्लाघा, आत्मप्रवंचना की जगह उनमें आत्मालोचना की प्रवृत्ति होती है, भूत के बजाय वर्तमान और भविष्य पर निगाहें होती हैं, परिस्थितियों के अनुसार रणनीति बदलने की क्षमता होती है।चूंकि ये सब पिछड़े वर्ग में नहीं हैं, इसलिए यह एक सोती हुई कौम है। थोड़ा और साफ शब्दों में कहें तो यह एक मरी हुई कौम है, इसलिए इस वर्ग की दशा-दिशा दूसरे लोग अपने मुहूर्त के हिसाब से करते हैं। पिछड़ा उस मुहूर्त में ही अपना शंखनाद करता है। जरा याद करें 1990 का वह दौर, जब वी.पी. सिंह ने मंडल आयोग लागू किया। पहली बार पिछड़ा वर्ग थोड़ी मात्रा में ही सही, अपने हक-हकूक के लिए लामबंद हुआ। एक वर्ग के रूप में हम एक हैं, हमारी सामाजिक समस्याएं एक हैं और हम एक होकर ही अपनी लड़ाई लड़ सकते हैं- यह अहसास पहली बार कौंधा। लेकिन संघ खेमा इस...

पिछड़े वर्ग का वैचारिक दिवालियापन

पिछड़े वर्ग के वैचारिक दिवालिएपन की सबसे सटीक व्याख्या चौधरी चरण सिंह ने की थी। उनके अनुसार पिछड़ा वर्ग किसी जाति का नहीं, बल्कि एक सोच का नाम है। जिस दिन इसकी सोच से पिछड़ापन हट जाएगा, उसी दिन यह कौम अगड़ी हो जाएगी। जिंदा कौमें वैचारिक रूप से स्पंदित होती हैं। उनमें चेतना के लक्षण होते हैं। आत्मश्लाघा, आत्मप्रवंचना की जगह उनमें आत्मालोचना की प्रवृत्ति होती है, भूत के बजाय वर्तमान और भविष्य पर निगाहें होती हैं, परिस्थितियों के अनुसार रणनीति बदलने की क्षमता होती है। चूंकि ये सब पिछड़े वर्ग में नहीं हैं, इसलिए यह एक सोती हुई कौम है। थोड़ा और साफ शब्दों में कहें तो यह एक मरी हुई कौम है, इसलिए इस वर्ग की दशा-दिशा दूसरे लोग अपने मुहूर्त के हिसाब से करते हैं। पिछड़ा उस मुहूर्त में ही अपना शंखनाद करता है। जरा याद करें 1990 का वह दौर, जब वी.पी. सिंह ने मंडल आयोग लागू किया। पहली बार पिछड़ा वर्ग थोड़ी मात्रा में ही सही, अपने हक-हकूक के लिए लामबंद हुआ। एक वर्ग के रूप में हम एक हैं, हमारी सामाजिक समस्याएं एक हैं और हम एक होकर ही अपनी लड़ाई लड़ सकते हैं- यह अहसास पहली बार कौंधा।...